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यूरिक एसिड क्या होता है

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दोस्तों आप सब लोगो का फिर से मेरे ब्लॉग में स्वागत है। आज हम जानेंगे यूरिक एसिड के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं। यूरिक एसिड शरीर और भोजन का किट मल है। भोजन में लेयुकलियेक एसिड और प्यूरिन के रूप में पाया  जाता है। यह अंडे मांस जलीय जीवों के मांस जिगर प्लीहा,गुर्दे, अग्नायश्य, मस्तिष्क, वानस्पतिक शाक, मटर, लोबिया, अनन्नास, मीठा, शराब, आदि में पाया जाता है। यूरिक एसिड क्या होता है, यदि पाचन क्रिया सही होती है, तब यूरिक एसिड कम मात्रा में बन पाता है लेकिन कमजोर पाचन शक्ति होने की स्थिति में ल्यूकलीयक एसिड और प्यूरिन यूरिक एसिड में बदल कर खून में मिल जाते हैं।और यूरिक एसिड जो सामान्यता 100 सी. सी. रक्त में 3मिली ग्राम होता है। इससे अधिक हो जाता है । सामान्यता लिवर यूरिक एसिड को यूरिया में बदल देता है जो गुर्दों के द्वारा मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। श्रम युक्त दिनचर्या न अपनाने तथा यूरिक एसिड बाहुल्य वाले खाद पदार्थों के सेवन तथा पाचन क्रिया दुर्बल होने अथवा रोग कारक अन्य कारण उपस्थित होने पर और लिवर तथा गुर्दे भी विकृत हों तो रक्त में यूरिक एसिड इकट्ठा हो जाता है और ...

गठिया के लक्षण क्या है

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दोस्तों आप सब के बीच में फिर हाजिर हूं एक नए ब्लॉग के साथ आप सब लोगो का फिर से स्वागत है  आज हम चर्चा करेंगे सर्दियों में अपाहिज बना देने वाले रोग गठिया  की जिसे आयुर्वेद में आमवात भी कहा जाता है ,तो चलिए शुरू करते हैं , इसमें दो राय नहीं है कि भोजन जो जिंदगी देने वाला होता है,यह सही तरीके से हजम होने पर यह सेहतमंद होने का आधार बन जाता है ,लेकिन हाजमा सही न होने पर यही भोजन शरीर में बीमारी की वजह बनता है ,!भोजन का पाचन उदारस्थ जठराग्नि से होता है ,जठर में उपस्थित इस आग में  लो और लपट तो नही निकलती लेकिन एक विषेस शक्ति रूपी ताप होता है ,जो खाए हुए भोजन को पचाने का काम करती है ।जब तक हाजमा सही रूप में रहता है खाया पिया अच्छी तरह से पचता रहता है और व्यक्ति रोगों से बचा रहता है ।लेकिन जब किसे वजह से व्यक्ति का हाजमा खराब हो जाता है तब खाया पिया भोजन ठीक से नही पचता और पेट में सड़ता है और जो कई रोगों का कारण बनता है ।यहां हम जिस गठिया रोग की चर्चा कर रहे है । उस रोग की वजह यही खराब हाजमा है ।दरअसल जब खराब हाजमे की वजह से खाया हुआ खाना ठीक से हजम नही होत...

त्रिफला के लाभ जो अनमोल है

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त्रिफला हरड़, बहेड़ा आंवला के योग को कहा जाता! हरद, बहेड़ा, और आंवला तीनो के मेल को त्रिफला कहा जाता है ये  तीनो ही गुणकारी चीज़ें एक जगह  ही मिलेंगी तो स्वत ही अत्यंत गुणकारी बनेगी ही ! इसलिए त्रिफला को आयुर्वेद में स्वास्थ्य रक्षा और रोग निवारण में बहुत उपयोगी माना जाता है ,! कई लोगों के अनुभव में यह आया है की , यदि त्रिफला का प्रयोग ऋतु अनुकूल अनुपान के साथ किया जाए तो तब त्रिफला के गुण शरीर में अधिक प्रभावशाली ढंग से फायदेमंद साबित होते हैं! ऐसे में अनेक स्त्री पुरुष हैं, जिन्हाेंने त्रिफला कल्प से एक नही अनेक लाभ प्राप्त किए हैं! यह कहा जाता है की दवाई चाहे कोई भी हो उसकी आदत डालना कितना ठीक है, इसके उत्तर में हमारा मानना है चूंकि त्रिफला में जो चीजें डाली जाती है वे मात्र फल ही हैं और सर्वदा फायदेमंद तथा निरापद है फिर इसका प्रभाव सौम्य रहता है ! अता लंबे समय तक प्रयोग करते रहने में भी कोई नुक्सान नहीं होना चाहिए!त्रिफला के लिए सबसे जरूरी है पहले तो त्रिफला तैयार करना होगा !तो आइए जानते हैं इसे कैसे तैयार किया जाता है,त्रिफला तैयार करने के लिए आप को चाहिए...

jukham jab khatrnak ho jaye

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App sabhi logon ka mere naye blog mein fir se swagat hai ajj janege jukam jab purana aur ziddi ho jata hai  to  chaliye suru karte hain ,naak ki bimari mein jukham ek parmukh bimari hai  ! Ayurved mei Ise pratisya kaha jata hai !yah ek ayesi bimari hai jo kabhi na kabhi  sabhi ko ho hi jati hai !samanyata jukham kuch dino mein apne aap hi thik ho jata hai lekin kuch mamlon  mein yah  vibbhinn karano se bigad jata hai !bigada jukham sahajta se dur nahi hota hai aur lambe samay tak pareshan karta hai ayurved mein ise zeerd pratisya kaha jata hai !jukham hone ke kaise karan hosakte hai ,maslan oss vaayu dhool adhik bolna adhik Sona ya adik jagna freedge ke thande jal ko pina ,pani mein adhik samaye tak bhige rahna aadi !ayurved mein jhukam (pratisya) ke 5bhed kahe Gaye hain 1vaatik2paietik3kafaj4raktaj5aursannipatak ik !dosanusaar pratisya mein alag alag lakshan prakat hote hain !vatik pratisya mein naak rundhi Hui rahti hai ,ussye patla estrav hot...

जाने पेट में वायु गोला होने के कारण लक्षण और घरेलु उपाय

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वार्तामन में पेट के रोगियों की सांख्य में भारी इजाफा हुआ है, मिलावटी और नकली खाने के समानअनियामित आहार विहार इसकी वजह है, साथ ही मानसिक तनाव भी असली कारण बना हुआ है,पेट के रोग अनेक है उसमें एक रोग जिस्मे आयुर्वेद में वायु गोला कहा जाता है ! पेट में वायु का गोला बन ना ! कब्ज़ की आधार शिला पर बनने वाला यह रोग क्या है! और कैसे इसका इलाज किया जाए!चलिये जानते हैं,!कबज (constipation)एक आम बीमारी के रूप में जाना जाता है! यह क्यों होता है! यह एक अलग विषय है कबज (constipation)की वजह से जब मलाशय मैं मल बहार नहीं निकालता और वही पड़ा हुआ रहता है तब उस गैस उत्तपन्न होती है! यह गैस जब पेट में भर जाती है  पूरा पेट फूल जाता है और अफारा की इस्तिथि बन जाती है इसी  तरह यह गैस जब अंतो के किसी खास हिस्से में इकत्था हो जाती है तब वह हिसा गेंद या गोले की तरह उबार जाता है गैस का या गोला कर रूप ही वायु गोला नमक रोग कहा जाता है पेट में जिस  जगह वायु गोला बन ता है वह हिस्सा गोला या गेंद जैसा उबार आता है! जिसे दबा कर महसूस किया जा सकता है !बहार से भी देखने पर भी! वैसे बहार से यह तबी गोलक...

मधुमेह रोगी ka जीवन और परहेज

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मधुमह के रोगी का जीवन और परहेज मेरे प्यारे दोस्त ये मधुमेह रोग पर मेरा दूसरा लेख है  आशा है कि कुछ जानकारी आप लोगो तक पहुचना चाहूँगा! हमारी चर्चा का विषय मधुमेह है! जो भारत में जिस तेजी से पैर फेला रहा है! इसे देखते हुए चिकिस्टक और विश्लेषण भी हैरन है! चिंता की बात ये है कि लाख कोसिस के बाद भी अभी तक रोग का पक्का इलाज मौजूद नहीं है !दवाओं के सहरे अथवा स्यामित दिनचर्या और श्रमयुक्त दिनचर्या अपना इसे नियंत्रित किया जा सकता है! जैसीकी हम पहले भी अपने पहले ब्लॉग में बता चुका है कि जो मधु में का मरिज मधु में के बारे में जितनी जानकरी रखे गा! वह अपने मधुमह पर उतना ही नियंत्रण कर सकता है और रोग के साथ समान्य जीवन जी सकता है! कुछ ऐसे खानपान के बारे में की खाना चाहिए की नहीं खाना चाहिए जिनके बारे में ज्यादाता तार मधुमेह रोगियों को मलुम नहीं होता है (हमने अपने पिछले ब्लॉग में आप लोगों को बताया था कि मधुमेह रोगी को भोजन कैसे करना चाहिए यह जाने के लिए हमारा पिछला ब्लॉग देख सकते हैं! आज हम बात करेंगे डायबिटिक आटे की चपाती मधुमह के रोगी के लिए फ़ायदेमंद रहती है) डायबिटिक आटा बनाने के ...

जोड़ो के दर्द में मेथी के फायदे

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मेथी के कुछ प्रयोग ईश्वरेश्वर की बनायी दुनिया में मेथी जैसी औषधि शायद ही कोई और हो आयुर्वेदाचार्यों ने हर जगह आसनी से मिलने वाली मेथी के बारे में विस्तार से बताया है आयुर्वेद की किताबों में लिखा है, मेथी वाटा को शांत करती है! और कफ व बुखार को दूर करती है! मेथी को heart को लभकारी, हल्की रुचा रस में कडवी, चरपरी गरम बलकारक तथा ज्वर अरोचक वमन वात रक्त काफ खांसी बवासीर कृमि और शुक्रनाशक बताया गया है! मेथी काफ और वात परकीर्ति वालों को हितवहा है! मेथी का कार्यक्षेत्र मुख्य पचन संस्थान तथा गौड़ क्षेत्र रक्तादि धातु और वात  नदी है!या अमाशय यकृत अंतो रक्त प्रवाह और वात नादियों पर उत्तेजक प्रभाव दृष्टि है मुंह में बनी रहने वाली मिठेपन की शिकायत इसके सेवन से दूर हो जाती है अमाश्य का  रस भडने लगता है ! और उससे ताकत मिलती है!  अमाश्य की  मंथन क्रिया में तेजी आती है! विभिन्ना वात रोगो में मेथी की विविध कल्पनाओं का सेवन भारतीय समाज में प्राचीन काल से हो रहा है आज भी घर के बुजुर्ग सर्दी के मौसम में मेथी के लड्डू प्रयोग करते हैं चलिये अब आपको बताते हैं जोड़ दर्द के साथ मेथ...