त्रिफला के लाभ जो अनमोल है

त्रिफला हरड़, बहेड़ा आंवला के योग को कहा जाता! हरद, बहेड़ा, और आंवला तीनो के मेल को त्रिफला कहा जाता है ये तीनो ही गुणकारी चीज़ें एक जगह  ही मिलेंगी तो स्वत ही अत्यंत गुणकारी बनेगी ही ! इसलिए त्रिफला को आयुर्वेद में स्वास्थ्य रक्षा और रोग निवारण में बहुत उपयोगी माना जाता है ,! कई लोगों के अनुभव में यह आया है की , यदि त्रिफला का प्रयोग ऋतु अनुकूल अनुपान के साथ किया जाए तो तब त्रिफला के गुण शरीर में अधिक प्रभावशाली ढंग से फायदेमंद साबित होते हैं! ऐसे में अनेक स्त्री पुरुष हैं, जिन्हाेंने त्रिफला कल्प से एक नही अनेक लाभ प्राप्त किए हैं! यह कहा जाता है की दवाई चाहे कोई भी हो उसकी आदत डालना कितना ठीक है, इसके उत्तर में हमारा मानना है चूंकि त्रिफला में जो चीजें डाली जाती है वे मात्र फल ही हैं और सर्वदा फायदेमंद तथा निरापद है फिर इसका प्रभाव सौम्य रहता है ! अता लंबे समय तक प्रयोग करते रहने में भी कोई नुक्सान नहीं होना चाहिए!त्रिफला के लिए सबसे जरूरी है पहले तो त्रिफला तैयार करना होगा !तो आइए जानते हैं इसे कैसे तैयार किया जाता है,त्रिफला तैयार करने के लिए आप को चाहिए 
हरड़ पीली (बड़ी)दस ग्राम 
बहेड़ा  बीस ग्राम
आंवला चालीस ग्राम 
तीनो सामग्री लेकर कूट कर बारीक पीस ले त्रिफला तैयार है त्रिफला बनाना आसान है आंवला और बहेड़ा कूटने से पहले इनकी गुठली निकाल दिया जाता है  त्रिफला बना कर साफ शीशी में रख लें त्रिफला तैयार है ! कुछ लोग त्रिफला में तीनो सामग्री एक बराबर डालते है  यह तरीका भी सही है , मात्रा कहने का तारिक जितनी उम्र उतनी रत्ती और आप चाहें जब तक खा सकते हैं , इस्तेमाल का तरीका सुबह खाली पेट सादा पानी के साथ इस्तेमाल करें , आप चाहें तो इसमें आवश्यकता अनुसार सेंधा नमक भी मिला सकते है ,
फायदा कहा जाता है कि अगर इसका सेवन नियमित रूप से १२वर्ष तक किया जाए तो शरीर की सारी व्याधियां निकल निकल कर भागने लगती है !इस त्रिफला के बारे में कहा गया है कि पहले वर्ष में सुस्ती जाए दूसरे मेंरोग सब मिट जाएं 
ध्यान रहे _____त्रिफला एक बार में दो महीने की मात्रा भर ही तैयार करना चाहिए!त्रिफला का सेवन करने से दो  चार दिन तक पतले दस्त आयेंगे 

सुबह त्रिफला सेवन करने के एक घंटे  तक चाय, कॉफी , दूध आदि का इस्तेमाल न करें 

आयुर्वेद का सर्व प्रचलित त्रिफला बनाईऐ और फायदा उठाइए आगे फिर मिलेंग दूसरे ब्लॉग में 

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