गठिया के लक्षण क्या है

दोस्तों आप सब के बीच में फिर हाजिर हूं एक नए ब्लॉग के साथ आप सब लोगो का फिर से स्वागत है  आज हम चर्चा करेंगे सर्दियों में अपाहिज बना देने वाले रोग गठिया  की जिसे आयुर्वेद में आमवात भी कहा जाता है ,तो चलिए शुरू करते हैं , इसमें दो राय नहीं है कि भोजन जो जिंदगी देने वाला होता है,यह सही तरीके से हजम होने पर यह सेहतमंद होने का आधार बन जाता है ,लेकिन हाजमा सही न होने पर यही भोजन शरीर में बीमारी की वजह बनता है ,!भोजन का पाचन उदारस्थ जठराग्नि से होता है ,जठर में उपस्थित इस आग में  लो और लपट तो नही निकलती लेकिन एक विषेस शक्ति रूपी ताप होता है ,जो खाए हुए भोजन को पचाने का काम करती है ।जब तक हाजमा सही रूप में रहता है खाया पिया अच्छी तरह से पचता रहता है और व्यक्ति रोगों से बचा रहता है ।लेकिन जब किसे वजह से व्यक्ति का हाजमा खराब हो जाता है तब खाया पिया भोजन ठीक से नही पचता और पेट में सड़ता है और जो कई रोगों का कारण बनता है ।यहां हम जिस गठिया रोग की चर्चा कर रहे है । उस रोग की वजह यही खराब हाजमा है ।दरअसल जब खराब हाजमे की वजह से खाया हुआ खाना ठीक से हजम नही होता है तो  वह पेट में एक कच्चे आम का रस जैसा एक रस बनता है और पेट में इकट्ठा होता रहता है  जो न सिर्फ दर्द की वजह बनता है बल्कि कई छोटी बड़ी बीमारी की वजह बनता है ।आम जैसे कच्चे रस से शुरू होने वाली बीमारी जिसे आयुर्वेद में आमवात भी कहा जाता है ,और आम बोल चाल भाषा में गठिया भी कहा जाता है हाजमा कमजोर होने की वजह से जब खाना अच्छी तरह हजम नही होता है तो उससे जो कच्चा रस बनता है उसे आम कहते है यह आमरस स्त्रोतों का अवरोध करता है हाजमे को कमजोर करता है और क्यों की रस का स्थान आयुर्वेद में हृदय बताया गया है जब रस हृदय में पहुंचता है तो वहां भी बीमारी पैदा करता है इससे हृदय भारी लगने लगता है । हृदय से वायु द्वारा प्रेरित होकर यह आम रस कफ स्थनों में पहुंचता जाता है तथा धमनियों में खून के साथ बहता रहता है इस आम रस को कमजोर हाजमे की वजह से खराब वात पित्त कफ और भी खराब कर देते हैं और फिर एक साथ प्राकुपित  ये दोष और रस के साथ जोड़ों में दर्द की वजह बन जाते है ।
लक्षण।
शरीर में कमजोरी दिल में भारी पन ,भोजन न करने की इच्छा न होना ,काम में मन न लगना आदि लक्षण  गठिया रोग शुरू होने के पहले होते हैं  इसके बाद आम का खट्टा हो कर जोड़ों में ठहर कर दर्द पैदा करता है  ।हाथ पैर सिर कमर जांघ घुटनों के जोड़ में दर्द के साथ सूजन और बुखार पैदा करता है गठिया के ये विशेष लक्षण है ।
गठिया के कुछ लक्षण 
अधिक सूजन होने पर वायु की गठिया समझना चाहिए।
शरीर में जलन होने या लालपन होने पर पित की गठिया समझना चाहिए ।
शरीर गीले कपड़े से लिपटा हुआ सा महसूस होना खुजली होना कफ की गठिया समझनी चाहिए
ध्यान रखें गठिया का रोग होने पर उसका इलाज जल्दी कराना चाहिए नही तो रोग पुराना हो जाने पर वह रोग कठिनाई से जाता है या नहीं भी जाता है । आइए कुछ उपाय बताते है जब गठिया रोगी को ज्यादा दर्द हो तो एक सूती कपड़े में बालू भर कर उसे तवे पर गर्म कर के दर्द वाली जगह पर सिंकाई करें  और गठिया होने पर ठंडे पानी से नही नहाना चाहिए बुखार होने साबूदाना जैसे हल्के आहार दें। दही का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें ,दर्द वाली जगह पर गर्म पट्टी या रूई लपेटना चाहिए 
और अब पेश है आयुर्वेद के कुछ नुस्खे 
हरड़ का पाउडर 3ग्राम को एरंड ,(कैंस्टर ऑयल)  10ग्राम तेल में मिला कर खाएं दिन में एक बार 
लहसुन सोंठ निर्गुंडी बराबर मात्रा में लेकर पाउडर (चूर्ण) बनाएं और इसमें से 20ग्राम की मात्रा लेकर इस  पाउडर का काढ़ा बना कर सुबह शाम इस्तेमाल करें गठिया में यह नुस्खा फायदेमंद है  इसमें जो जड़ी बूटी बताई गई है वो सब जड़ी बूटी की दुकान पर आसानी से मिल जायेगी 
20ग्राम दसमूल का काढ़ा बना कर उसमें1ग्राम छोटी पिपली का पाउडर मिला कर पीना गठिया में फायदेमंद है 
सोंठ और गिलोय के काढ़े में 1ग्राम छोटी पिपली का पाउडर डाल कर पिएं । सुबह शाम इस नुस्खे को लेते रहने से गठिया का रोग मिट जाता है 
रात को 200ग्राम खजूर पानी में भिगो दें सुबह उसे मसल कर रस निचोड़ कर पी लें।इस नुस्खे को लगातार फायदा होने तक करें
और आखिर में 
परहेज क्या खाना है 
एक साल पुराना चावल एरंड का तेल ,परवल, करेला बैंगन,सहजना ,गरम पानी साबूदाना,बिना घी चुपड़ी रोटी,अदरक खाना चाहिए 


क्या नही खाना है 
दही ,मछली , गुड,दूध, उड़द, कचौरी,पूरब की हवा, मल मूत्र ना रोकें,अगर गठिया के साथ बुखार भी हो तो चावल का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
तो आप लोगों को कैसी लगी यह जानकारी कमेंट में जरूर बताएं 

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