उच्च रक्तचाप,(ब्लड प्रेशर)में उपयोगी है लहसुन

आप लोगों का फिर से मेरे नए ब्लॉग में स्वागत है आज हम चर्चा करेंगे उच्च रक्त चाप (यानी ब्लड प्रेशर के बारे में तो चलिए शुरू करते हैं।यह सही है  आज की लाइफ स्टाइल में हाइपरटेंशन के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इनसे मानसिक तनाव होना स्वाभाविक है।हम यहां हाइपरटेंशन यानी ब्लड प्रेशर पर चर्चा करने जा रहे हैं यह रोग क्यूं और कैसे होता है इस पर विस्तार में ना जाकर संकेत मात्र से जानकारी देकर चिकित्सा के रूप में लहसुन का प्रयोग बताने जा रहे हैं ।
जीवित रहने के लिए ब्लड प्रेशर का होना अनिवार्य है । लेकिन सामान्य से ज्यादा होना बीमारी है जो हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के नाम से जाना जाता है । हाइपरटेंशन की बहुत सी वजह होती है जिनमें मुख्य कारण कुछ इस तरह हैं।
पारिवारिक हिस्ट्री,मानसिक तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन,  श्रमरहित जीवनचर्या, गुर्दे की बीमारियां, नमक का ज्यादा इस्तेमाल।
ब्लड प्रेशर को चार कैटेगरी में बांटा जा सकता है । हालांकि यह कैटेगरी में बांटना किन्ही ठोस सबूत पर आधारित नहीं है।यहां यह समझना भी जरूरी है की नॉर्मल ब्लड प्रेशर 120/80M.M. होता है , लेकिन उम्र ज्यादा होने और बुढ़ापा में पहुंचने के साथ साथ एक सीमा तक बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर नॉर्मल ही माना जाता है ।
पहली कैटिगरी ___160 m.m. सिस्टोलिक प्रेशर और 95m.m.डिस्टोलिक प्रेशर तक होने को फर्स्ट कैटेगरी में रखा जाता है , इसे (माइल्ड) हाइपरटेंशन कहते है ।
कैटेगरी नंबर 2_____180 M.M. सिस्टोलिक और 105 M.M डीस्टोलिक प्रेशर को मॉडरेट हाइपरटेंशन,यानी मीडियम कैटिगरी का कहा जा सकता है ।
कैटिगरी नंबर 3_____200 M.M. सिस्टॉलिक और 115 M.M. डिस्टॉलिक प्रेशर इसे , सिवियर, हाइपरटेंशन कहते हैं ।
कैटिगरी नंबर 4______ जो ब्लड प्रेशर कैटेगरी नंबर 3 पार कर जाता है उसे ग्रॉस हाइपरटेंशन ,कहा जाता है ।
ब्लड प्रेशर में उपयोगी हर्बल दवा।
हाइपरटेंशन में सर्प गंधा,(सर्पासिल)और लहसुन (गार्लिक) को बहुत उपयोगी पाया गया है ।आयुर्वेद में हाई ब्लड प्रेशर पर लाभकारी अनेक औषधीय योगों में इनका प्रयोग होता है
जहां तक सर्पगंधा की बात है तो इसकी हाइपरटेंशन पर इसकी उपदेयता दुनिया भर में मान्य है ।
लहसुन (गार्लिक) हाई ब्लड प्रेशर पर कितना उपयोगी हो सकता है ।इस पर पूरी दुनिया में हुए रिसर्च के रिजल्ट पॉजिटिव रहे हैं ।दशकों से इस हर  जगह मिलने वाली वस्तु का उपयोग हाइपरटेंशन पर खूब किया जा रहा है। जेनेवा यूनिवर्सिटी से पब्लिश ,मेडिकल प्रैक्टिस, नाम की मैगजीन में पब्लिश एक इंटरव्यू में डॉक्टर प्लूटर बिस्की ने लिखा था । लहसुन (गार्लिक) हाई ब्लड प्रेशर को कम करने का लिए बहुत कामयाब चीज है । उन्होंने लिखा मैंने हाई ब्लड प्रेशर के 100 मरीजों पर एक्सपरमेंट किया और सभी दशाओं में सफलता प्राप्त की ।40 फीसदी रोगियों का हाई ब्लड प्रेशर तो लहसुन खिलाते ही कम होना शुरू हो गया। इससे रोगियों की सिकुड़ी हुई रक्त वाहिनियां फैलना शुरु हो जाती हैं।और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कम हो जाता है ।दिल का दर्द और सिर चकराने जैसे लक्षण भी दूर हो जाते हैं।
डॉक्टर प्लूटर बिसकी हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को शुरु के 5_7 दिन तक लहसुन का जूस पिलाते थे।और फिर धीरे धीरे उसकी मात्रा कम करते जाते उनका अनुभव था कि रोग के लक्षण 3_4 दिन में ही कम होने लगते हैं ।अनुभव में ज्यादा कलियों वाले लहसुन की तुलना में कम से कम कलियों वाला लहसुन ज्यादा फायदेमंद पाया गया है ।इस तरह के लहसुन में केवल एक गांठ या फांक होती है जब की ज्यादा तर लहसुन में 8से लेकर 20फांके मिलती हैं । लहसुन की फांक को छील कर 100ग्राम के करीब बारीक काट कर एक लीटर गाय के दूध में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं पका कर खोआ बना लें

इस मावा में बराबर की खांड मिला कर 50_ 50 ग्राम के लड्डू बना लें और सुरक्षित रखें ।
1_2 लड्डू रोज सुबह दूध के साथ पाचन शक्ति के अनुसार सेवन करें ।
इसके सेवन से रक्त वाहिनियों में कोमलता बनी रहती है और दिल ठीक तरह से काम करता है।तथा पाचन शक्ति बढ़ती है ।नतीजतन बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर भी नॉर्मल हो जाता है ।
इन लड्डुओं के सेवन से विभिन्न वात रोगों में भी अत्यंत लाभ होता है ।काम शक्ति भी बढ़ती है ।एक और प्रयोग इस तरह है ।लहसुन की 1_2 फांक को छील कर सुबह निहार मुंह पानी से सेवन करें ।और लहसुन की मात्रा धीरे धीरे बढ़ाएं।इस प्रयोग से भी हाई ब्लड प्रेशर,बहुत से वात रोग (जोड़ों)के दर्द जैसे रोगों में लाभ होने लगता है ध्यान रहे लहसुन सेवन काल में खट्टे पदार्थ,मांस , शराब,का सेवन नहीं करना चाहिए ,साथ ही मानसिक शांति बनाए रखना लाजिमी है । पित्त वाले लोग जिन्हें पित्त ज्यादा बनता है उन्हें लहसुन का सेवन सावधानी से करना चाहिए।
लहसुन पर हमारी यह जानकारी हाई ब्लड प्रेशर के लिए थी।वैसे  लहसुन और भी अनेक रोगों में फायदेमंद है ।जैसे नासूर जैसी हठीली बीमारी में लहसुन का रस निकल कर नासूर के जख्म में डालने से जख्म नासूर धीरे धीरे ठीक होने लगता है ।
ब्लड प्रेशर में लहसुन के रस का इस्तेमाल करने से ब्लड प्रेशर कम हो कर दिल पर पड रहा दबाव घट जाता है ।और दिल को ताकत मिलती है मूत्र करने की गिनती बढ़ जाती है । कफ के पुराने विकारों में जैसे खांसी , श्वास , श्वास लेने में कठिनाई होना , श्वसन नली में सूजन होना जैसे विकार लहसुन से मिट जाते हैं।इसके लिए लहसुन का अवलेह उपयोगी रहता है । इस ब्लॉग को यही समाप्त करते हैं फिर मिलेंग अगले ब्लॉग में अगर आप लोगों को यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने और दोस्तो तक इस जानकारी को पहुंचाएं शेयर करें कमेंट करें और इसी तरह की अच्छी अच्छी जानकारी के लिए हमें फॉलो करें 

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